अलग -अलग पार्टियों का किसी 'एक कारण' के लिए साथ आना कभी भी आसान काम नहीं होता है। लेकिन कई बार उन्हें साथ आना पड़ता है, क्योंकि उनके कार्यकर्ता और वोटर्स भी ऐसा चाहते हैं। आजकल देश भर में यह चर्चा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस, सपा-बसपा, टीएमसी, राजद, टीडीपी, एनसीपी, आरएलएसपी जैसे 23 छोटे-बड़े ऐसे दल एक साथ आये हैं, जिनकी विचारधारा एकसमान नहीं है। यह बात आंशिक रूप से सच भी है। लेकिन इनमें से कुछ दल पहले भी यूपीए सरकार में साथ रह चुके हैं. इसके अलावा इन दलों में से ज्यादा का दायरा एक राज्य तक ही सीमित है. लेकिन दूसरा सच यह भी है कि ये सारे दल 'झूठे प्रचार के सहारे चल रही एक सरकार' को रोकने आयी है। मौजूदा मोदी नित एनडीए सरकार जनपक्षधर होने का दावा तो करती है, लेकिन युवाओं के लिए इनके पास 'रोजगार' नहीं है। बड़े-बड़े मित्र उद्योगपतियों के लिए तो इस सरकार के पास 'कई ऑफर' हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी जैसा कठोर टैक्स सिस्टम। अपनी मजबूती दिखाने के चक्कर में बिना किसी होमवर्क के देश की जनता पर जीएसटी का ब...